खजुराहो में अब जनजातीय देवलोक व सांस्कृतिक गांव की इंटरनेशनल ब्रांडिंग

Source By TNN Local
7 एकड़ के गांव में मप्र की समग्र संस्कृति की दिखेगी झलक . मध्यप्रदेश की क्षेत्रीय और आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर की इंटरनेशनल ब्रांडिंग के लिए सरकार ने विश्वविख्यात पर्यटन स्थल खजुराहो में अनूठा सांस्कृतिक गांव और जनजातीय देवलोक ही बसा दिया। 7 एकड़ के इस सांस्कृतिक गांव में सभी अंचलों की सांस्कृतिक झलक, उनके देवलोक और जनपदीय आवास बनकर तैयार हैं। बारिश के बाद भव्य स्तर पर जनजातीय देवस्थल के लोकार्पण की तैयारी की गई है। मप्र के लघु रूप (मिनिएचर) को दर्शाने वाले इस गांव में जनजातीय संस्कृति के साथ ही उनके कला पक्ष पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय की तर्ज पर विश्व धरोहर खजुराहो में प्रदेश का संस्कृति विभाग यह सांस्कृतिक गांव आदिवर्त के निर्माण में जुटा है। इसमें जनजातीय म्यूजियम के पहले चरण का लोकार्पण हो चुका है। बारिश के बाद संस्कृति विभाग जनजातीय देवलोक और जनपदीय आवासों को भी पर्यटकों के दर्शनार्थ खोल देगा।
पुरातत्व के साथ हस्तशिल्प ग्रेनाइट जैसे कठोर पत्थर पर अनूठे शिल्प, पुरातात्विक व ऐतिहासिक मंदिरों के साथ ही समग्र जनजातीय संस्कृति और उनके देवस्थलों की झलक दिखाने वाला यह गांव खजुराहो का नया आकर्षण बनेगा। यहां बनने वाले आवासों में पर्यटकों के लिए प्रदेश की ट्राइब्स की संस्कृति, हस्तशिल्प और रहन-सहन की सामग्री से रूबरू कराया जाएगा।
खजुराहो क्यों है प्रसिद्ध खजुराहो मंदिर भारतीय कला के सबसे महत्वपूर्ण नमूनों में से एक हैं। ग्रेनाइट जैसे कठोर पत्थरों पर बारीक नक्काशी वाले हिंदू-जैन मंदिरों के निर्माण में शिल्पियों को करीब 100 साल का कालखंड लगा।
विंध्य, बुंदेलखंड, महाकोशल, मालवा की जनजातियों की झलक विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्रदेश की 7 प्रमुख जनजाति गौंड, बैगा, भील, कोरकू, सहरिया, भारिया और कोल की जीवंत झलक इस गांव (आदिवर्त) में दिखेगी। इन जनजातियों की 43 उपजातियों की पहचान, परंपराएं और प्रतीक चिन्हों का संग्रहण भी किया जा रहा है। इसके अलावा मप्र के पांच प्रमुख अंचल बुंदेलखंड, विंध्य, मालवा-निमाड़, महाकोशल और ग्वालियर-चंबल की सांस्कृतिक धरोहर की झलक भी इस गांव में सजोई गई है। ट्राइबल कलाकृतियां, हस्तशिल्प, आभूषण और चित्र आदि भी इन आवासों में सजाए गए हैं।