ट्राइबल न्यूज और पर्यावरण पोस्ट से राज्यसभा सांसद समीर उरांव की खास बातचीत

नई दिल्ली – 13 फरवरी – झारखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव से पर्यावरण पोस्ट और ट्राइबल न्यूज नेटवर्क ने बातचीत की. पढ़िए पर्यावरण पोस्ट और ट्राइबल न्यूज की तरफ से
अविनाश और राज्यसभा सांसद समीर उरांव की बातचीत के कुछ खास अंश
सवाल : झारखंड में जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे है क्या ये जमीनी स्तर ऐसा हो पा रहा है?
इस सवाल के जवाब में समीर उरांव ने कहा कि सरकार ने आजादी के बाद से ही किसानों,गरीबों और आदिवासियों के प्रगति के लिए कई प्रकार की योजनाएं बनाई गई. लेकिन पिछले 65 वर्षों में धरातल पर ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया है. चाहे झारखंड की जनजाति हो या फिर देश के अन्य प्रदेश के जनजाति हो उनकी समस्याएं जश के तश बनी रही. जिसके कारण वो एक राज्य से दूसरे राज्य में लगातार पलायन करते रहे. ये जो पलायन का सबसे बड़ा सवाल जनजातियों के बीच है. कई प्रकार के पलायन उनके बीच है एक तो उनके पास रोजगार नहीं है..दूसरी बात ये की अगर उनके पास हुनर होगी तो वो शहर में जाकर काम कर सकेंगे..तीसरा ये की प्राकृतिय समस्याएं भी है. लेकिन इन पलायन को कैसे रोका जाएं इसको लेकर पिछले दिनों की सरकारों ने कुछ सोचा ही नहीं.समीर उरांव ने कहा कि जनजातियों के उत्थान के लिए सबसे अहम ये है कि उनका पलायन रोका जाएं और इसके लिए जरूरी है उनको रोजगार मिले. रोजगार के साथ ही उनका पलायन रुकेगा..अब देश के प्रधानमंत्री ने इसके लिए ही आम्तनिर्भर भारत की शुरुआत की है. लोकल फॉर फोकल का नारा दिया है. जैसे की आप जानते है कि वो वनों में रहते है और वहां से वनस्पतियां और भी कई प्रकार के वन उत्पाद को बढ़ावा देने का काम चल रहा है. भारत सरकार ने ट्राइबर मिनिस्ट्री की ओर से वन धन योजना चला रही है. इसके तहत वनों से जरूरी चीजें इक्टठा की जाएंगी और उनको बाजार में भी बेचने की व्यवस्था की जा रही है.
सवाल : इससे पहले झारखंड में जब 5 साल बीजेपी की सरकार थी तो क्या उनके लिए कुछ योजनाएं शुरू की गई थी?
इस पर राज्यसभा सांसद श्री उरांव कहते हैं कि कई योजनाओं की शुरुआत हुई है जैसे गांव को सड़क से जोड़ा गया. आदिवासियों के विकाश के लिए आदिवासी विकाश परिषद का गठन सरकार की तरफ से किया गया था. झारखंड के ज्यादातर आदिवासी कृषि के कामों से जुड़े हुए है.ऐसे में उस वक्त के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास जी ने मुख्यमंत्री आर्शीवाद योजना की शुरुआत की थी..जिसके तहत किसानों और आदिवासियों को लाभ मिला. इसके तहत उन्हें 5 हजार रुपय दिए गए.
सवाल : कहां की ऐसी जनजाति है जहां के लोग तेजी से मुख्यधारा से जुड़ रहे है?
इस सवाल के जवाब में समीर उरांव कहते हैं कि डिजीटल इंडिया के माध्यम से हर जगह के जनजाति जुड़ रहे है. सरकार जब संसाधन उनके लिए उपलब्ध करवाएंगी तो जनजाति और उभर कर सामने आएंगी.
सवाल : झारखंड एक नक्सल प्रभावी राज्य है ये भी जंगल में रहते है तो क्या नक्सली आदिवासियों के जीवन को प्रभावित करते है?
इसपर समीर उरावं ने कहा कि नहीं ऐसा नहीं है..यहां के आदिवासी अगर प्रगति नहीं कर पा रहे है तो इसकी बड़ी वजह है रोजगार, आत्मनिर्भरता, स्वलंबि हो जाएंगे तो फिर आदिवासियों की समस्याएं खत्म हो जाएंगी.ये सारे काम अब केंद्र सरकार कर रही है. प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत की शुरुआत की है जिससे आदिवासियों को बहुत लाभ मिलेगा. व्यपार के क्षेत्र में अब ये आगे बढ़ रहे है.
इस बातचीत में उन्होंने हेमंत सोरेन पर निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस झारखंड सरकार को गुमराह कर रही है.कांग्रेस के चंगुल में झारखंड सरकार चल रहा है और ये आदिवासियों की प्रगति नहीं चाहते है.
झारखंड में धर्म परविर्तन के सवाल पर समीर जी ने कहा की धर्म परिवर्तन के लिए कानून बनी हुई है बस इसे सही से लागू करने की जरूरत है.